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By Mushaahid Raza.

मेरा दिल जिगर जिस पे कुर्बान है, मेरी मां मेरी जान है, मेरी मां मेरी जान है

मेरा दिल जिगर जिस पे कुर्बान है, मेरी मां मेरी जान है, मेरी मां मेरी जान है...
मेरी आखिरत का ये सामान है, मेरी मां मेरी जान है, मेरी मां मेरी जान है...

नबी ने सहाबा को अपने दिखाकर
हलीमा के कदमों में चादर बिछा कर
ब सीताया है मां की बड़ी शान है, मेरी मां मेरी जान है, मेरी मां मेरी जान है...

सताता है मुझको ज़माने का जब गम
तो देकर तसल्ली वो कहती है हर दम
मेरे लाडले क्यों परेशान है, मेरी मां मेरी जान है, मेरी मां मेरी जान है...

परेशानियों में गले वो लगाए
वो भूखी रहे फिर भी मुझको खिलाए
ये कितना बड़ा उसका एहसान है, मेरी मां मेरी जान है, मेरी मां मेरी जान है...

बलाएं मेरी लौट जाती हैं सर से
में मां की दुआ लेके चलता हूं घर से
मुसीबत मेरी खुद ही हैरान है, मेरी मां मेरी जान है, मेरी मां मेरी जान है...